उत्तराखंड में सड़कों पर थमे वाहनों के पहिए, ड्राइवरों की हड़ताल से यात्रियों को भारी परेशानी

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हड़ताल के चलते उत्तराखंड परिवहन निगम की बसें डिपो में खड़ी रहीं, जबकि निजी बसों के साथ ही ट्रक, टैक्सी-मैक्सी और विक्रम वाहनों के पहिए भी थमे रहे। इससे यात्रियों को ज्यादा राहत नहीं मिली और वे सड़कों पर खड़े होकर वाहन की तलाश करते रहे।

देहरादून : केंद्र सरकार की ओर से वाहन दुर्घटना से जुड़े कानून में किए गए सजा के नए प्रविधानों के विरोध में वाहन चालकों की देशव्यापी हड़ताल में नए साल के पहले ही दिन उत्तराखंड में करीब छह लाख व्यावसायिक वाहनों के पहिये थम गए हड़ताल के चलते परिवहन निगम की बसें डिपो में खड़ी रहीं, जबकि निजी बसों के साथ ही ट्रक, टैक्सी-मैक्सी व विक्रम वाहनों के पहिये भी थमे रहे। ऐसे में यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ी। ई-रिक्शा 1 संचालकों ने मनमाना किराया वसूला डीजल व पेट्रोल के टैंकर चालकों के भी हड़ताल में शामिल होने से कई जगह पंपों पर तेल नहीं पहुंचा। हालांकि, सोमवार रात करीब आठ बजे राज्य सरकार की सख्ती के बाद उत्तराखंड परिवहन निगम के चालकों ने बस संचालन शुरू कर दिया जिससे यात्रियों को बड़ी राहत मिली।

वाहन दुर्घटना में हिट एंड रन के मामले में चालकों के विरुद्ध दस साल की सजा व सात लाख रुपये जुमाने के प्रविधान के विरोध में सभी व्यावसायिक वाहनों के चालक बगैर पूर्व नोटिस के सोमवार सुबह हड़ताल पर चले गए। इससे नए साल के पहले दिन परिवहन व्यवस्था पटरी से उतर गई

उत्तराखंड में हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। रोजाना दौड़ने वाले लगभग दो लाख छोटे-बड़े ट्रकों के पहिये तो रविवार मध्य रात्रि से ही थम गए थे, जबकि चार लाख सार्वजनिक यात्री वाहनों के पहिये सोमवार की सुबह थमे, हड़ताल में टैक्सी मैक्सी के शामिल होने से पर्वतीय क्षेत्रों की लाइफ लाइन थमी रही।

गढ़वाल व कुमाऊं मंडल में पर्वतीय व दूरस्थ मार्गों के यात्री पूरे दिन सड़कों पर खड़े होकर वाहन की तलाश करते रहे। राज्य के परिवहन सचिव अरविंद सिंह यांकी के निर्देश पर आरटीओ शैलेश तिवारी व उत्तराखंड परिवहन निगम के महाप्रबंधक दीपक जैन देहरादून आइएसबीटी पहुंचे और चालकों से बसें चलाने का आग्रह किया, लेकिन चालकों ने इन्कार कर दिया। हड़ताली चालकों व परिवहन अधिकारियों के बीच नोंकझोंक भी हुई । कुछ जगह वाहनों का संचालन करने पर हड़तालियों की वाहन संचालकों से झड़प भी हुई।

प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार को ज्ञापन भी प्रेषित किया गया। परिवहन निगम प्रबंधन ने बसों को उपलब्ध न कराने के कारण अनुबंधित आपरेटरों के भुगतान से प्रतिदिन के हिसाब से 50 हजार रुपये कटौती का आदेश दे दिया है।

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